सड़क की गुणवत्ता पर फिर सवाल, 80–90% ‘ठीक’ बताकर बचने की कोशिश?


सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच विभागीय इंजीनियर का बयान सामने आया है। इंजीनियर ने दावा किया है कि जांच के बाद सड़क की गुणवत्ता 80 से 90 प्रतिशत सही पाई गई। हालांकि यह बयान जनता के गड्ढों में फंसे रोज़मर्रा के अनुभव से मेल नहीं खाता।
इंजीनियर ने सड़क के जल्दी खराब होने की वजह ओवरलोडिंग को बताया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब ओवरलोड वाहन खुलेआम दौड़ रहे थे, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
अगर ओवरलोडिंग ही वजह है, तो निगरानी, चेकिंग और कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में लापरवाही बरती गई है और अब जिम्मेदारी से बचने के लिए आंकड़ों का सहारा लिया जा रहा है। 80–90 प्रतिशत गुणवत्ता का दावा तब खोखला लगता है, जब सड़क कुछ ही समय में उखड़ जाए।
जनता की मांग है कि
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,
स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा जांच हो,
और ओवरलोडिंग पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी सड़कों पर सफर करना आम जनता के लिए जानलेवा बना रहेगा।