स्वयं सहायता समूह ने बदली कचरा प्रबंधन की तस्वीर नाथुपुर में आरआरसी मॉडल बना सफलता की मिसाल, स्वच्छता के साथ समूह की महिलाओं को मिला आजीविका का अवसर


जौनपुर। विकास खंड सिरकोनी की ग्राम पंचायत नाथुपुर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में पहल करते हुए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) के संचालन को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर प्रभावी मॉडल विकसित किया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत शुरू की गई इस व्यवस्था से गांव में नियमित कूड़ा संग्रहण और कचरा प्रबंधन के साथ स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए आय का अवसर भी सृजित हुआ है।

आरआरसी के संचालन की शुरुआत ग्राम पंचायत की ओर से केंद्रीय वित्त आयोग के टाइड फंड से ई-रिक्शा और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के साथ की गई थी। हालांकि, संचालन से जुड़े व्यक्ति को सीधे आय का अवसर नहीं मिलने के कारण व्यवस्था नियमित रूप से संचालित नहीं हो सकी और कुछ समय बाद आरआरसी निष्क्रिय हो गया।

इसके बाद ग्रामवासियों और दुकानदारों से शुल्क लेकर कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था शुरू करने का प्रयास किया गया, लेकिन नियमित भुगतान को लेकर असहमति और अपेक्षित जनसहभागिता नहीं मिलने से यह मॉडल भी लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सका।

इन अनुभवों से सीख लेते हुए ग्राम पंचायत और प्रशासन ने आरआरसी के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को सौंपने का निर्णय लिया। समूह को आरआरसी भवन, बिजली-पानी की सुविधा, संपर्क मार्ग, सक्रिय ई-रिक्शा और प्रारंभिक संचालन सहयोग उपलब्ध कराया गया। समूह को गांव में नियमित कूड़ा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण, निस्तारण और रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई।

समूह के सदस्यों को विकास खंड स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और आरआरसी संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय कबाड़ दुकानों का भ्रमण कराकर विभिन्न प्रकार के कचरे के मूल्य और उसके उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई। विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे की सफाई, वर्गीकरण, बंडलिंग और मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेहतर कीमत पर बेचकर आय अर्जित की जा सके।

नई व्यवस्था के बाद गांव में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। ग्राम पंचायत के परिवारों द्वारा घरों में ही गीले और सूखे कचरे को अलग किया जा रहा है। निर्धारित रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन कूड़ा वाहन घर-घर पहुंचकर कचरा एकत्र करता है। इसके बाद कचरे को आरआरसी पर लाकर उसका पृथक्करण और उचित निस्तारण किया जाता है।

इस व्यवस्था से गांव की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को कचरे के जरिए आय अर्जित करने का व्यावहारिक अवसर मिला है। ग्रामीणों में भी कचरा पृथक्करण और नियमित कूड़ा संग्रहण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। नाथुपुर ग्राम पंचायत का यह मॉडल स्वच्छता व्यवस्था को आजीविका से जोड़ते हुए जनभागीदारी और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।

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