वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित मिन्नालाल तिवारी का निधन, न्यायिक जगत में शोक की लहर 61 वर्षों तक दीवानी न्यायालय में की वकालत, अधिवक्ता संघ परिसर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि; रामघाट पर हुआ अंतिम संस्कार

जौनपुर, 15 अक्टूबर। जिले के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता पंडित मिन्नालाल तिवारी का गुरुवार को ओलंदगंज स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह लगभग 89 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही न्यायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अधिवक्ताओं, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
मूल रूप से मछलीशहर तहसील क्षेत्र के महापुर गांव निवासी पंडित मिन्नालाल तिवारी, स्वर्गीय पंडित हरिहर प्रसाद तिवारी के पुत्र थे। उन्होंने वर्ष 1965 में दीवानी न्यायालय जौनपुर में वकालत की शुरुआत की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय बलदेव जी मेहरोत्रा के यहां उन्होंने स्वर्गीय सूर्यबली यादव एडवोकेट के साथ अपने न्यायिक जीवन की शुरुआत की। लगभग 61 वर्षों तक न्यायालय में वकालत करते हुए उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। फौजदारी मामलों में उनके लंबे अनुभव और पेशेवर योगदान के लिए उन्हें जिले के वरिष्ठ अधिवक्ताओं में गिना जाता था। उनके पुत्र राहुल तिवारी भी अधिवक्ता हैं।
राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने दी श्रद्धांजलि
पंडित मिन्नालाल तिवारी के निधन की सूचना मिलने पर जौनपुर सदर के विधायक एवं प्रदेश सरकार में खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव उनके आवास पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा शोकाकुल परिजनों से मिलकर अपनी संवेदना व्यक्त की।
अधिवक्ता संघ परिसर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार से पूर्व पंडित मिन्नालाल तिवारी के पार्थिव शरीर को दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ परिसर में लाया गया। यहां अधिवक्ताओं ने माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लंबे न्यायिक जीवन एवं योगदान को याद किया।
इस दौरान दीवानी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह, मंत्री मनीष सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता तेज बहादुर सिंह, प्रेम शंकर मिश्र, दुष्यंत सिंह, गौरी शंकर मिश्रा, सतेंद्र बहादुर सिंह, रमेश चंद उपाध्याय तथा जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) लाल बहादुर पाल समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
इसके बाद आदि गंगा गोमती के पावन तट रामघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में अधिवक्ताओं के साथ व्यापारी, राजनेता, समाजसेवी और पत्रकार बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनके निधन से जिले के विधिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।