छह महीने से फर्जी दरोगा बनकर कन्नौज में जमा था संजीव, वर्दी का रौब दिखाकर करता था ठगी 2014 बैच का आईकार्ड दिखाते ही खुली पोल, पुलिस की पूछताछ में सामने आया फर्जीवाड़ा; कानपुर में भी पकड़ा जा चुका है आरोपी

कन्नौज। पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों पर रौब जमाने और कथित तौर पर ठगी करने वाले एक फर्जी दरोगा को कन्नौज पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी संजीव कुमार पिछले छह महीने से सरायमीरा के कृष्णा नगर मोहल्ले में किराये के मकान में रह रहा था। खुद को वर्ष 2014 बैच का दरोगा बताकर वह लोगों पर धौंस जमाता था। पुलिस की पूछताछ में जब उसने वर्ष 2014 बैच का आईकार्ड दिखाया, तो उसके दावे पर संदेह गहरा गया। जांच में फर्जी पुलिसकर्मी होने की पुष्टि होने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे तिर्वा क्रॉसिंग चौराहे के पास पुलिस की नजर वर्दी पहने एक युवक पर पड़ी। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर कोतवाली प्रभारी जितेंद्र प्रताप सिंह और सरायमीरा चौकी प्रभारी विश्वनाथ आर्या ने उससे पूछताछ शुरू की। युवक ने अपना नाम संजीव कुमार बताया और खुद को फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के रठौरा गांव का निवासी बताया।
पूछताछ के दौरान संजीव ने दावा किया कि वह वर्ष 2014 बैच में दरोगा के पद पर भर्ती हुआ था। अपने दावे के समर्थन में उसने पुलिस का आईकार्ड भी दिखाया। हालांकि, पुलिस को उसके जवाबों पर संदेह हुआ। सरायमीरा चौकी प्रभारी विश्वनाथ आर्या के मुताबिक, वर्ष 2014 में दरोगा भर्ती नहीं हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने उसके दावों की जांच की, जिसमें उसका फर्जीवाड़ा सामने आया।
कानपुर में भी फर्जी दरोगा बनकर पकड़ा गया था
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि आरोपी संजीव कुमार को वर्ष 2024 में कानपुर नगर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की पुलिस भी फर्जी दरोगा बनकर लोगों पर रौब जमाने के आरोप में पकड़ चुकी है। उस मामले में वह काफी समय तक जेल में रहा था। जेल से छूटने के बाद उसने कथित तौर पर दोबारा पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया और कन्नौज में रहने लगा।
पुराने रिकॉर्ड और ठगी के मामलों की जांच में जुटी पुलिस
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने कन्नौज में रहते हुए कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया और किन-किन लोगों से ठगी की। पुलिस उसके अन्य संभावित साथियों और गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को अधिकारी बताने वाले लोगों को लेकर एक बार फिर सतर्कता का मुद्दा सामने आया है। आम लोगों से अपील है कि किसी व्यक्ति की पहचान पर संदेह होने पर संबंधित पुलिस थाने को सूचना दें और उसके दबाव में आकर पैसे या अन्य सामान न दें।