वाल्मीकि रामायण जीवन के पुरुषार्थों की संहिता: स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती लखनऊ में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण पर आधारित श्रीराम कथा का शुभारंभ, भव्य कलश यात्रा में उमड़े श्रद्धालु

लखनऊ, 21 अक्टूबर। महर्षि वाल्मीकि की रामकथा जीवन के चार पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की संहिता है। आज समाज में धर्म और मोक्ष की उपेक्षा कर अर्थ और काम को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जिसके कारण सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यह विचार महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज ने बुधवार को जानकीपुरम विस्तार के सेक्टर सात स्थित सूर्या अकादमी में श्रीमद् वाल्मीकि रामायण पर आधारित श्रीराम कथा के प्रथम दिन व्यक्त किए।
स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती ने कहा कि धर्म और मोक्ष जैसे महत्वपूर्ण पुरुषार्थों से दूर होती शिक्षा पद्धति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से भगवान श्रीराम के पावन चरित्र का वर्णन करने के साथ ही सत्य, धर्म, कर्तव्य, करुणा, मर्यादा, त्याग, भक्ति और आदर्श जीवन के मूल्यों को भी समाज के सामने प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण की प्रामाणिकता सार्वभौमिक है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक विभिन्न समाजों में भगवान श्रीराम के चरित्र की महिमा का गुणगान होता है। रामकथा के अनेक कथाकार भी महर्षि वाल्मीकि की रामायण का उल्लेख करते हैं।
स्वामी जी ने माता सीता के चरित्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामायण का अध्ययन करते समय भगवती सीता के चरित्र में अद्वितीय आदर्श दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि विपत्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सत्य और धर्म का आश्रय लेकर उसका सामना किया जा सकता है। जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर रामायण मनुष्य को धैर्य, साहस और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान प्रस्तुत सुमधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया।
भव्य कलश यात्रा के साथ धर्म समागम का शुभारंभ
इससे पूर्व बुधवार सुबह आठ बजे एकेटीयू स्थित श्री हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसके साथ ही धार्मिक आयोजन का शुभारंभ हुआ। हल्के गुलाबी रंग की पारंपरिक बंगाली साड़ियों में सजी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर पवित्र कलश धारण कर यात्रा में भाग लिया। वहीं, हरिहर सेवा समिति के सैकड़ों स्वयंसेवक निर्धारित गणवेश में रामधुन और भजनों की धुन पर उत्साहपूर्वक शामिल हुए। समिति की युवा वाहिनी ने भी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कलश यात्रा में कथा के यजमान पवित्र श्रीमद् वाल्मीकि रामायण को सिर पर धारण किए चल रहे थे, जबकि सुसज्जित बग्घी में कथा व्यास स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज विराजमान थे। यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
यात्रा डीपीएस स्कूल के सामने से होते हुए भवानी चौराहे और अटल चौराहे से गुजरकर कथा स्थल सूर्या अकादमी पहुंची। यहां कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद आवश्यक व्यवस्थागत सूचनाएं दी गईं और सभी सहभागियों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
पुलिस और स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था
कलश यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने में थाना जानकीपुरम की पुलिस टीम के उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार, राम सिंह, सृष्टि वर्मा और मुख्य आरक्षी अजीत कुमार सहित महिला सुरक्षा स्वयंसेविकाओं ने योगदान दिया।
हरिहर सेवा समिति के सदस्यों और सहयोगियों के अनुसार, इस बार कलश यात्रा में बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी देखने को मिली। वर्ष 2023 से लगातार आयोजित हो रहे समिति के वार्षिक धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में यह चौथा आयोजन है।
आयोजकों के मुताबिक, लखनऊ में रामकथाओं की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन श्रीमद् वाल्मीकि रामायण पर आधारित इस विशेष रामकथा का आयोजन विशिष्ट महत्व रखता है। श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर उत्साह दिखाई दिया।