इतिहास का काला दिन: 4 अप्रैल 1905 कांगड़ा भूकंप


1905 कांगड़ा भूकंप भारत के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। 4 अप्रैल 1905 को हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में आए इस भीषण भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी।
इस भूकंप की तीव्रता लगभग 7.8 मापी गई थी, जिसने कांगड़ा घाटी, धर्मशाला और मैक्लोडगंज जैसे क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया। इस आपदा में 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब एक लाख इमारतें ध्वस्त हो गईं और हजारों पशु भी मारे गए।
उस समय यह इलाका ब्रिटिश शासन के तहत तत्कालीन पंजाब प्रांत का हिस्सा था, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भी भारी चुनौतियां सामने आईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह भूकंप पश्चिमी हिमालय क्षेत्र का सबसे घातक भूकंप माना जाता है। हालांकि, भारत के इतिहास में इससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप भी दर्ज किए गए हैं, लेकिन जनहानि के लिहाज से यह घटना बेहद भयावह थी।
आज भी हर साल 4 अप्रैल को इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही, भूकंप संभावित क्षेत्रों में सतर्कता, मजबूत निर्माण और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।

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