प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट की यूपी पुलिस और सिस्टम पर सख्त टिप्पणी, जमानत याचिका खारिज करते हुए जताई गंभीर चिंता


प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट () ने एक हत्या मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस और पूरी न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “तारीख मिलती रही लेकिन इंसाफ नहीं मिला”, और इस टिप्पणी के लिए फिल्म ‘दामिनी’ के डायलॉग का भी संदर्भ दिया।
कोर्ट ने हत्या मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई। साथ ही अदालत ने देरी के पीछे करीब 14 प्रमुख कारणों को सूचीबद्ध किया, जिनमें सिस्टम की कई खामियां उजागर की गईं।
मुख्य कारणों में अभियुक्तों का समय पर पेश न होना, पुलिस स्टाफ की भारी कमी, समन और वारंट की तामीली में लापरवाही, और गवाहों—विशेषकर पुलिस व डॉक्टरों—का कोर्ट में उपस्थित न होना शामिल बताया गया है। इसके अलावा एफएसएल रिपोर्ट (Forensic Science Lab) मिलने में हो रही देरी पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।
कोर्ट ने राज्य सरकार और डीजीपी को 11 सूत्रीय निर्देश जारी किए हैं और व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया है। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि जिलों में जजों को सुरक्षा के लिए PSO (Personal Security Officer) उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए।
इस फैसले को न्यायिक प्रणाली में सुधार और पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक अहम टिप्पणी माना जा रहा है।

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