देशहित की जिम्मेदारी सिर्फ जनता की नहीं, बल्कि नेतृत्व की भी उतनी ही है।
देशहित में अगर आम जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने, सोना कम खरीदने और खर्च घटाने की अपील की जा रही है, तो जनप्रतिनिधियों को भी उदाहरण पेश करना चाहिए।
जनता टैक्स देती है, महंगाई झेलती है और हर संकट में देश के साथ खड़ी रहती है। ऐसे में सांसद, विधायक, मंत्री और अन्य माननीयों का भी योगदान स्पष्ट दिखना चाहिए।
सरकारी खर्च, अनावश्यक रैलियां और सुविधाओं में कटौती पर भी गंभीर सोच होनी चाहिए। जहां मेट्रो सुविधा है, वहां जनप्रतिनिधि भी उसका उपयोग करें। पेट्रोल-डीजल की बचत करें, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दें और वर्चुअल मीटिंग, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग व वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं को अपनाएं।
देशहित की जिम्मेदारी सिर्फ जनता की नहीं, बल्कि नेतृत्व की भी उतनी ही है।