‘नदियों का मायका’ बूंद-बूंद को तरसा! मध्य प्रदेश की 175 नदियां बनीं बरसाती, 27 पूरी तरह सूखी


भोपाल। कभी ‘नदियों का मायका’ कहलाने वाला मध्य प्रदेश आज गंभीर जल संकट की मार झेल रहा है। हालत यह है कि प्रदेश की 207 नदियों में से 175 नदियां अब केवल बरसात के दिनों तक सीमित होकर रह गई हैं, जबकि 27 नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं।
यह सिर्फ भीषण गर्मी का असर नहीं, बल्कि वर्षों से प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़, अनियोजित विकास और जल स्रोतों की अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है। बढ़ता तापमान, जंगलों की कटाई, अंधाधुंध भूजल दोहन और नदियों के संरक्षण में लापरवाही ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में पानी का संकट और गहरा सकता है। कई इलाकों में गांवों और किसानों के सामने पेयजल और सिंचाई की बड़ी समस्या खड़ी हो चुकी है।
प्रदेश में सूखती नदियां अब सिर्फ पर्यावरण संकट नहीं, बल्कि आने वाले समय की बड़ी चेतावनी बनती जा रही हैं।

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