KFD NEWS | पंचायत चुनाव पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पूर्व प्रधानों को प्रशासक बनाने पर उठाए सवाल


लखनऊ। पंचायत चुनाव में देरी और ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ही प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस व्यवस्था की वैधता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट स्थिति बताने को कहा है। �

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए गए और इसके बजाय उन्हीं प्रधानों को प्रशासक बनाकर कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उनके कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ा दिया गया, जो कानून की भावना के विपरीत है। �

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों में देरी को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC आयोग) की रिपोर्ट और चुनाव कार्यक्रम की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनाव समय पर न कराना और फिर पूर्व प्रधानों को प्रशासक बनाना गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करता है। �

याचिका में यह भी कहा गया कि पहले ऐसी परिस्थितियों में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, लेकिन इस बार पूर्व प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंप दी गई। �

अब इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद पंचायत चुनाव और ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर प्रदेश भर में चर्चा तेज हो गई है। �

नोट: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में अदालत द्वारा अंतिम फैसला सुनाए जाने और व्यवस्था को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित करने के दावे किए जा रहे हैं। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई जारी है। �

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