जौनपुर में भी मंडरा रहा लखनऊ जैसा खतरा! प्रशासनिक जांच में खुली कोचिंग संस्थानों की पोल

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जौनपुर। लखनऊ में कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, लेकिन उससे सबक लेने की जरूरत केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। जौनपुर में जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए विशेष जांच अभियान ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियां इस ओर संकेत करती हैं कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो जिले में भी किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
मंगलवार को अपर जिलाधिकारी परमानंद झा एवं मुख्य अग्निशमन अधिकारी राज प्रकाश राय के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने शहर के आठ कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकांश संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई। कई जगह अग्निशमन यंत्र नहीं मिले, कहीं विद्युत तार अव्यवस्थित और असुरक्षित अवस्था में पाए गए, जबकि कई भवनों में आपातकालीन निकास द्वार तक उपलब्ध नहीं था।
निरीक्षण के दौरान एक भवन की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक पाई गई। भवन के निचले दो तल पर कपड़ों की दुकानें संचालित हो रही हैं, जबकि तीसरी मंजिल पर कोचिंग संस्थान चल रहा है। वहां पहुंचने के लिए बनी संकरी सीढ़ियां किसी भी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में छात्रों के सुरक्षित निकास में गंभीर बाधा बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने अथवा भगदड़ की स्थिति में ऐसे भवन अत्यंत जोखिमपूर्ण साबित हो सकते हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कई कोचिंग संस्थान भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। अग्निशमन विभाग के निर्धारित मानकों का पालन किए बिना ही बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
लखनऊ हादसे के बाद हुई इस कार्रवाई ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा के केंद्र माने जाने वाले इन संस्थानों में यदि आपदा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा की मूलभूत व्यवस्थाएं तक नहीं हैं, तो हजारों छात्रों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
जिला प्रशासन ने जिन संस्थानों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासनिक जांच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लखनऊ जैसी त्रासदी का खतरा केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। जौनपुर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है। आवश्यकता इस बात की है कि हादसा होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं, ताकि छात्रों की सुरक्षा और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।

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