अमरनाथ यात्रा में अव्यवस्था के आरोप, हिमशिवलिंग समय से पहले लुप्त होने पर उठे सवाल


सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर इस वर्ष 2026 में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिमशिवलिंग इस बार कथित तौर पर समय से पहले ही लुप्त हो गया, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान प्रशासनिक कुप्रबंधन और अव्यवस्था के आरोप सामने आए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि पंजीकरण प्रक्रिया में अनियमितताएं देखने को मिलीं, जहां कथित तौर पर पैसे लेकर अवैध रजिस्ट्रेशन और वीआईपी लोगों को प्राथमिकता देने की शिकायतें सामने आईं। इसके चलते आम श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा।
यात्रा मार्ग और गुफा परिसर में क्षमता से अधिक भीड़ पहुंचने की भी बात कही जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक भीड़ और बढ़ते तापमान के कारण गुफा के भीतर का वातावरण प्रभावित हुआ, जिससे हिमशिवलिंग के जल्दी पिघलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
वहीं, कई श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि उचित व्यवस्था और समन्वय के अभाव में बड़ी संख्या में लोग बिना दर्शन किए ही लौटने को मजबूर हुए।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमरनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं और प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर योजना, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।