चीन के मेगा डैम पर खतरे की घंटी, भारत भी हुआ सतर्क

नई दिल्ली। चीन के तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर अब सुरक्षा चिंताएं गहरा गई हैं। चीन की ही एक सरकारी एजेंसी से जुड़ी वैज्ञानिक रिपोर्ट ने इस मेगा डैम की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना के नीचे सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है, जिससे भविष्य में भूकंप, भूस्खलन और बड़े हादसों का खतरा बढ़ सकता है। हिमालयी क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, ऐसे में इस तरह के विशाल बांध पर खतरे की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
⚠️ क्या हैं मुख्य खतरे?
परियोजना क्षेत्र के नीचे एक्टिव फॉल्ट लाइन की मौजूदगी
भूकंप आने पर डैम स्ट्रक्चर को भारी नुकसान की आशंका
भूस्खलन और अचानक जल प्रवाह से नीचे के इलाकों पर खतरा
ब्रह्मपुत्र के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों (भारत-बांग्लादेश) पर संभावित असर
🇮🇳 भारत का रणनीतिक जवाब
इसी बीच भारत ने भी सीमा क्षेत्र में अपनी तैयारी तेज कर दी है।
अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास 1000 मेगावाट की नायिंग हाइड्रो पावर परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी गई है।
यह कदम न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से अहम है, बल्कि इसे रणनीतिक संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
🌐 क्यों अहम है यह मामला?
ब्रह्मपुत्र नदी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की जीवनरेखा है
चीन के किसी भी बड़े प्रोजेक्ट का असर जल प्रवाह और पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है
सुरक्षा और पर्यावरण दोनों मोर्चों पर क्षेत्रीय संतुलन जरूरी
👉 कुल मिलाकर, चीन के मेगा डैम को लेकर उठे सवालों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं भारत भी सीमा पर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुट गया है।