बेटी ने निभाया बेटे का फ़र्ज़, पिता को दिया कंधा और मुखाग्नि
वाराणसी। मानवता और साहस की एक मार्मिक मिसाल सामने आई है, जहां एक बेटी ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने पिता को कंधा देकर अंतिम विदाई दी और स्वयं मुखाग्नि देकर बेटे का फ़र्ज़ निभाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओबरा निवासी एक बुजुर्ग का शव कुछ दिनों पूर्व कबीरचौरा शवगृह में लावारिस अवस्था में रखा गया था। काफी प्रयासों के बाद उनके परिजनों का पता चला, जिसमें केवल पत्नी और तीन विवाहित बेटियाँ ही थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय बताई गई।
परिजनों के साथ थाने पहुंचने पर पहचान के लिए आधार कार्ड मांगा गया, लेकिन बेटियों ने बताया कि वर्षों पहले घर में लगी आग में सभी दस्तावेज़ जल गए थे। कागजात के अभाव में आशंका थी कि बुजुर्ग का अंतिम संस्कार लावारिस के रूप में कर दिया जाएगा।
इस स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पहल की और ओबरा के मार्कुंडी थाना तथा वाराणसी कोतवाली पुलिस से लगातार संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद परिवार को वैधानिक वारिस घोषित किया गया, जिससे वे अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सके।
अंतिम संस्कार के समय बड़ी बेटी पहले हिचकिचाई, लेकिन कुछ देर बाद उसने साहस जुटाते हुए कहा, “ये मेरे पिता हैं… इन्हें अंतिम विदाई भी मैं ही दूँगी।” इसके बाद वह अकेले अपने पिता को कंधा देकर श्मशान घाट तक ले गई और पूरे विधि-विधान के साथ मुखाग्नि दी।
इस भावुक क्षण को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। बेटी के इस साहसिक कदम ने समाज को एक नई दिशा दी है, जहां बेटियाँ भी हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दे।