हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: पुलिस को छर्रा तक नहीं लगा, अभियुक्त के पैरों में ही गोली कैसे लगी? श्रावस्ती के अलाउद्दीन कथित एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच के आदेश

लखनऊ। श्रावस्ती के अलाउद्दीन कथित एनकाउंटर मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि पुलिस की 23 सदस्यीय टीम पर फायरिंग होने के बावजूद किसी पुलिसकर्मी को गोली या छर्रा नहीं लगा, जबकि अभियुक्त के दोनों पैरों में ही गोली कैसे लगी?
मामले में हाईकोर्ट ने कथित एनकाउंटर की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस के अनुसार अलाउद्दीन ने 23 सदस्यीय पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। थाना प्रभारी अश्विनी कुमार दुबे का कहना था कि हथियार लोड किए जाने की आवाज सुनने के बाद आत्मरक्षा में उन्होंने दो गोलियां चलाईं, जो अलाउद्दीन के दोनों पैरों में लगीं।
अदालत ने थाना प्रभारी की निशानेबाजी क्षमता की जांच कराने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि रात के समय करीब 15 मीटर की दूरी से केवल हथियार लोड किए जाने की आवाज सुनकर 9 एमएम सर्विस पिस्टल से सटीक निशाना लगाना व्यावहारिक रूप से संभव था या नहीं।
हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब पुलिस टीम में 23 लोग मौजूद थे और सामने ई-रिक्शा पर सवार केवल एक व्यक्ति था, तो पुलिस उसे रोकने में कैसे असफल रही।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद कथित हाफ एनकाउंटर और पुलिस मुठभेड़ों की कार्रवाई को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। अब सीबीआई जांच के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि श्रावस्ती के अलाउद्दीन मामले में पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई।