पत्रकारों के लिए जरूरी कानूनी जानकारी: कवरेज में बाधा डालने पर हो सकती है कार्रवाई धमकी, मारपीट, कैमरा तोड़ने या जबरन रोकने की स्थिति में घटना के अनुसार लग सकती हैं अलग-अलग धाराएं

नई दिल्ली। देश में 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू है। पत्रकारों के लिए कवरेज के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा रास्ता रोकने, जबरन रोकने, धमकी देने, मारपीट करने या उपकरणों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं में संबंधित तथ्यों के आधार पर विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
सदोष अवरोध और परिरोध: BNS की धारा 126 सदोष अवरोध से संबंधित है, जबकि धारा 127 सदोष परिरोध से संबंधित है। यदि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी दिशा में जाने से रोका जाता है या उसे निर्धारित सीमा से बाहर जाने से रोककर रखा जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार इन धाराओं का सवाल उठ सकता है।
कैमरा या अन्य उपकरण को नुकसान: किसी पत्रकार के कैमरे, मोबाइल या अन्य संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की स्थिति में घटना के तथ्यों के आधार पर BNS की धारा 324 (रिष्टि/Mischief) सहित संबंधित प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है।
धमकी, गाली-गलौज या मारपीट: धमकी, जानबूझकर अपमान, चोट या अन्य आपराधिक कृत्य होने पर घटना की प्रकृति के अनुसार संबंधित BNS धाराएं लग सकती हैं। कौन-सी धारा लागू होगी, यह घटना के वास्तविक तथ्यों और पुलिस की जांच पर निर्भर करता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि BNS की धारा 221 लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालने से संबंधित है। इसलिए इसे सामान्य रूप से पत्रकार को कवरेज से रोकने की धारा बताना सही नहीं होगा।
शिकायत या FIR में क्या जानकारी दें?
पत्रकार को घटना की शिकायत में अपना परिचय, कवरेज का स्थान और समय, घटना का पूरा विवरण, आरोपी द्वारा की गई कार्रवाई, धमकी या मारपीट का विवरण तथा कैमरा/मोबाइल आदि को हुए नुकसान का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। उपलब्ध होने पर फोटो, वीडियो, ऑडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी भी दी जा सकती है।
उदाहरण के तौर पर शिकायत में लिखा जा सकता है—
“मैं ………. समाचार पत्र/चैनल का ………. क्षेत्र का पत्रकार हूं। दिनांक ………. को मैं जनहित से संबंधित समाचार का कवरेज कर रहा था। इसी दौरान आरोपी ………. ने मुझे कवरेज करने से रोका तथा मेरे साथ ………. किया। घटना के दौरान मेरे कैमरा/मोबाइल/अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाया गया/धमकी दी गई/मारपीट की गई। घटना के संबंध में उपलब्ध फोटो, वीडियो एवं अन्य साक्ष्य प्रस्तुत कर रहा हूं। कृपया घटना के तथ्यों की जांच कर भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई1 की जाए।”
महत्वपूर्ण: FIR या शिकायत में धाराएं स्वयं तय करने के बजाय घटना के तथ्य स्पष्ट रूप से दर्ज कराना बेहतर है। लागू धाराओं का निर्धारण जांच एजेंसी और कानून के अनुसार किया जाता है।