अखिलेश यादव को भगवान राम के अवतार में दिखाने वाला पोस्टर, सियासत में चाटुकारिता पर उठे सवाल PDA रथ यात्रा से पहले रायबरेली में लगी होल्डिंग; सपा नेता ने 2027 में अखिलेश यादव को चुनने की अपील की
रायबरेली, उत्तर प्रदेश। PDA रथ यात्रा से पहले रायबरेली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भगवान राम के अवतार के रूप में दर्शाने वाली होल्डिंग चर्चा में आ गई है। होल्डिंग सपा नेता अखिलेश माही की ओर से लगाई गई बताई जा रही है। इसमें राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के मुद्दे को उठाते हुए वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को चुनने की अपील की गई है।
राजनीतिक पोस्टर में किसी नेता को धार्मिक प्रतीकों अथवा देवी-देवताओं के रूप में प्रस्तुत किए जाने को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं को कभी भगवान राम, कभी भगवान कृष्ण, तो कभी भगवान शिव या देवी के रूप में प्रदर्शित करने वाले पोस्टर सामने आते रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि राजनीति में नेताओं की इस तरह की धार्मिक छवियां गढ़ना चाटुकारिता की संस्कृति को बढ़ावा देता है। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में राजनेता जनता के प्रतिनिधि और सेवक होते हैं, जिन्हें उनके काम, नीतियों, जवाबदेही और जनहित में किए गए कार्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए।
हालांकि, समर्थक ऐसे पोस्टरों को राजनीतिक समर्थन और अपने नेता के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति के तौर पर देखते हैं। ऐसे में नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में प्रस्तुत करने की बढ़ती प्रवृत्ति लोकतांत्रिक राजनीति में राजनीतिक प्रतीकों और धार्मिक आस्था के इस्तेमाल को लेकर एक अहम बहस जरूर खड़ी करती है।
एक जागरूक लोकतंत्र में जनता के लिए महत्वपूर्ण यह है कि वह किसी भी नेता का मूल्यांकन काम, नीतियों, जनहित और विकास के मुद्दों पर करे, न कि प्रचार के लिए तैयार की गई किसी धार्मिक या दैवीय छवि के आधार पर।