“क्या देर से मिला न्याय, सच में न्याय है?” वाह रे हमारे भारत की न्याय व्यवस्था…

दिल्ली का एक बस कंडक्टर—
सिर्फ 5 पैसे की कथित चोरी के आरोप में
करीब 40 साल तक अदालतों के चक्कर काटता रहा।
सोचिए…
5 पैसे की कीमत क्या थी?
लेकिन उस आरोप ने उसकी पूरी ज़िंदगी की कीमत वसूल ली।
जब आखिरकार फैसला आया, तब तक—
उसकी उम्र ढल चुकी थी,
सपने टूट चुके थे,
और जिंदगी इंतज़ार में बीत चुकी थी।
⚖️ सबसे बड़ा सवाल—
क्या इतनी देर से मिला न्याय, वास्तव में न्याय कहलाता है?