UP में IAS सेवा से क्यों बढ़ रहा मोहभंग? लगातार इस्तीफों से उठे बड़े सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक चिंताजनक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लगातार आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के इस्तीफे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि सिस्टम के भीतर कुछ ऐसा है, जिससे अधिकारी असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।
हाल ही में IAS अधिकारी रिकू सिंह के इस्तीफे ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। इससे पहले जनवरी में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री भी सेवा छोड़ चुके हैं। इन घटनाओं ने प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
VRS और इस्तीफों की बढ़ती लिस्ट
उत्तर प्रदेश में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने वाले और इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारियों की सूची भी छोटी नहीं है। इनमें शामिल हैं—
राजीव अग्रवाल
मोहम्मद मुस्तफा
आमोद कुमार
रेणुका कुमार
जूथिका पाटणकर
विकास गोठलवाल
विद्या भूषण
रिग्जिन सैम्फिल
राकेश वर्मा
रविंद्र पाल सिंह
अभिषेक सिंह
अनामिका सिंह
क्या हैं वजहें?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—
राजनीतिक दबाव और हस्तक्षेप
कार्य-जीवन संतुलन की कमी
लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग का दबाव
फील्ड में बढ़ती चुनौतियां और जवाबदेही
प्राइवेट सेक्टर में बेहतर अवसर
प्रशासनिक व्यवस्था पर असर
लगातार हो रहे इस्तीफों का असर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। अनुभवी अधिकारियों के बाहर जाने से नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका है।
बड़ा सवाल
क्या उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में काम का माहौल इतना कठिन हो गया है कि अधिकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं?
या फिर यह बदलते समय के साथ करियर विकल्पों का प्रभाव है?