श्रद्धापूर्वक मनाई गई पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह की 79वीं जयंती, रिसर्च सेंटर में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा

सिकरारा, जौनपुर: डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह की 79वीं जयंती रविवार को उनके पैतृक गांव कलवारी स्थित डॉ. लालजी सिंह रिसर्च सेंटर में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लेकर महान वैज्ञानिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सिंह के भतीजे एवं संस्थान के प्रबंध निदेशक आशीष सिंह की देखरेख में किया गया।
🌼 पुष्पांजलि और व्यक्तित्व पर चर्चा
उपस्थित लोगों ने डॉ. लालजी सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सिंह ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से भारत को वैश्विक वैज्ञानिक पहचान दिलाई।
🔬 विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान
वक्ताओं ने बताया कि उनके शोध कार्यों ने अपराध अनुसंधान, न्यायिक प्रक्रिया, जैव प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की। ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले डॉ. लालजी सिंह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
🎓 युवाओं के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों और कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और कहा कि शिक्षा, अनुसंधान एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
👥 गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस अवसर पर प्राचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक लल्लन उपाध्याय, शरद सिंह प्रधानाचार्य, सुशील सिंह प्रधान प्रतिनिधि, आकाश मिश्र, डॉ. शोभनाथ यादव, धर्मेंद्र यादव, अरुण कुमार, अजय विश्वकर्मा, राजेश यादव, प्रकाश सिंह, रमेश, प्रशांत सिंह, दिनेश, संतोष, अवनीश सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
📢 निष्कर्ष
डॉ. लालजी सिंह की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि सभा रहा, बल्कि युवाओं को विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला भी साबित हुआ।