रावण के वेश में कांवड़ यात्रा, बहनों की सुरक्षा का दिया अनोखा संदेश
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)। सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और अनोखे संदेश का एक अलग ही रूप देखने को मिला। दिल्ली के मूलचंद त्यागी, जो श्रीरामलीला में रावण का किरदार निभाते हैं, इस बार रावण के वेश में कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंचे और वहीं से जल लेकर दिल्ली की ओर पैदल यात्रा कर रहे हैं।
रावण के वेश में कांवड़ यात्रा कर रहे मूलचंद त्यागी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनका कहना है कि उनका यह रूप केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है। त्यागी ने कहा, “हर बहन के लिए हर भाई को रावण बनना चाहिए। आज के समय में समाज में दरिंदों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में बहनों की सुरक्षा के लिए हर भाई को मजबूत और सजग बनना होगा।”
उन्होंने बताया कि रामलीला में रावण का किरदार निभाते हुए उन्होंने हमेशा यह महसूस किया कि रावण केवल एक खलनायक नहीं, बल्कि एक विद्वान और अपनी बहन के सम्मान के लिए लड़ने वाला भाई भी था। इसी सोच के साथ उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान यह संदेश देने का निर्णय लिया।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं और राहगीरों ने उनके इस अनोखे रूप और संदेश की सराहना की। कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
सावन के पवित्र माह में जहां एक ओर श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन हैं, वहीं मूलचंद त्यागी का यह प्रयास भक्ति के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दे रहा है।
रावण के वेश में कांवड़ यात्रा कर रहे मूलचंद त्यागी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनका कहना है कि उनका यह रूप केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है। त्यागी ने कहा, “हर बहन के लिए हर भाई को रावण बनना चाहिए। आज के समय में समाज में दरिंदों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में बहनों की सुरक्षा के लिए हर भाई को मजबूत और सजग बनना होगा।”
उन्होंने बताया कि रामलीला में रावण का किरदार निभाते हुए उन्होंने हमेशा यह महसूस किया कि रावण केवल एक खलनायक नहीं, बल्कि एक विद्वान और अपनी बहन के सम्मान के लिए लड़ने वाला भाई भी था। इसी सोच के साथ उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान यह संदेश देने का निर्णय लिया।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं और राहगीरों ने उनके इस अनोखे रूप और संदेश की सराहना की। कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनके विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
सावन के पवित्र माह में जहां एक ओर श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन हैं, वहीं मूलचंद त्यागी का यह प्रयास भक्ति के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दे रहा है।