लखनऊ, 17 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नई ई-केवाईसी व्यवस्था लागू की गई है।

खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा जारी शासनादेश के तहत अब राशन कार्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। आयुक्त रणवीर प्रसाद ने 16 अप्रैल को एनआईसी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ निदेशक राजीव रस्तोगी को पत्र भेजकर आरसीएमएस मॉड्यूल में तत्काल संशोधन के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब नए राशन कार्ड या अतिरिक्त यूनिटें पूर्ति निरीक्षक के डिजिटल हस्ताक्षर के बाद सीधे पात्रता सूची में शामिल नहीं होंगी। पहले इन्हें ‘ड्राफ्ट राशन कार्ड सूची’ में डाला जाएगा। आवेदक को मोबाइल पर एसएमएस के जरिए इसकी सूचना दी जाएगी, जिसमें नए सदस्यों की ई-केवाईसी पूरी कराने का निर्देश होगा।
ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है। मुखिया सहित सभी नए सदस्यों की केवाईसी पूरी होने के बाद ही राशन कार्ड सक्रिय किया जाएगा। जिन सदस्यों की केवाईसी पूरी नहीं होगी, उनके नाम सूची में प्रदर्शित नहीं होंगे। हालांकि, 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को इस प्रक्रिया से छूट दी गई है और उन्हें मुखिया की केवाईसी के आधार पर शामिल किया जा सकेगा। आवेदन में नाम, लिंग, आधार संख्या और जन्मतिथि दर्ज करना अनिवार्य होगा।
ड्राफ्ट सूची विभागीय लॉगिन पर उपलब्ध रहेगी, जबकि ‘राशनकार्ड लाभार्थी ई-केवाईसी रिपोर्ट’ में केवल उन्हीं यूनिट्स को शामिल किया जाएगा जिनकी केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एआरओ स्तर पर लंबित यूनिट्स को सीधे जोड़े जाने का प्रावधान भी रखा गया है।
नई व्यवस्था में पहले और अब की प्रक्रिया में स्पष्ट अंतर किया गया है। पहले जहां कार्ड डिजिटल हस्ताक्षर के बाद सीधे पात्रता सूची में शामिल हो जाता था, वहीं अब केवाईसी पूरी होने के बाद ही अंतिम सूची में नाम दर्ज होगा। पहले किसी प्रकार का एसएमएस अलर्ट नहीं मिलता था, जबकि अब आवेदन के साथ ही सूचना भेजी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस नई प्रणाली से फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत वास्तविक पात्रों तक ही सब्सिडी का लाभ पहुंचेगा। हाल के अभियानों में लाखों फर्जी यूनिटें हटाई जा चुकी हैं। नई व्यवस्था के लागू होने से जिला प्रशासन और उचित दर विक्रेताओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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