कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर सख्त रुख, प्रभारी निरीक्षक पर कार्रवाई के संकेत

गाजीपुर। न्यायालय के आदेश की अनदेखी करना पुलिस पर भारी पड़ता दिख रहा है। अपर न्यायाधीश प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने जमानियां थाना पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब सिविल न्यायालय द्वारा जारी स्थगनादेश (स्टे ऑर्डर) के बावजूद पुलिस द्वारा कथित रूप से लाभार्थियों को बेदखल कर विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने का प्रयास किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने सवाल उठाया है कि आखिर क्यों न प्रभारी निरीक्षक जमानियां की संपत्ति कुर्क कर उन्हें सिविल कारावास भेजा जाए।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आदेश 39 नियम 2ए (दीवानी प्रक्रिया संहिता) के तहत न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर कठोर कार्रवाई संभव है। साथ ही यह भी पूछा गया कि जब जिला जज द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पहले से प्रभावी था, तो उसे नजरअंदाज कर परगनाधिकारी के आदेश को प्राथमिकता क्यों दी गई।
यह पूरा मामला मूल वाद संख्या 167/2015 (गोवर्धन बनाम इन्द्रासनी देवी) और उससे संबंधित सिविल अपील संख्या 37/2025 से जुड़ा है, जिसमें 22 मई 2025 को दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था, जो अब भी प्रभावी है।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन का कर्तव्य होता है कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करें, न कि उसकी अवहेलना करें। न्यायालय ने इसे कानून के शासन (Rule of Law) में हस्तक्षेप जैसा गंभीर मामला माना है।
इस सख्त टिप्पणी के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। अदालत ने प्रभारी निरीक्षक जमानियां को नोटिस जारी कर जवाब तलब करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
👉 कुल मिलाकर, यह मामला न्यायालय के आदेशों की अनदेखी पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम उदाहरण बनता दिख रहा है।