CBSE 12वीं रिजल्ट के बाद JEE Advanced अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। Central Board of Secondary Education के 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम आने के बाद हजारों छात्रों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। इस बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के चलते पास प्रतिशत घटकर 85.20% रह गया, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम बताया जा रहा है।
इसी बीच 17 मई को होने वाली JEE Advanced परीक्षा से पहले कई छात्र असमंजस में हैं। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्होंने JEE Main में 90 से 99 पर्सेंटाइल तक अंक हासिल कर क्वालिफाई किया, लेकिन 12वीं बोर्ड परीक्षा में 75% अंकों का अनिवार्य मानदंड पूरा नहीं कर सके। ऐसे में अब उनके लिए आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मुश्किल होता नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि इस बार स्टेप-वाइज मार्किंग प्रणाली काफी सख्त रही, जिससे विज्ञान वर्ग के छात्रों विशेषकर फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में अंक प्रभावित हुए।
दो बड़े बदलावों से बढ़ी परेशानी
इस वर्ष सीबीएसई ने 10वीं छात्रों को दो बोर्ड परीक्षा और तीन विषयों में सुधार परीक्षा का विकल्प दिया है, जबकि 12वीं के छात्रों को केवल एक विषय में सुधार परीक्षा की अनुमति है। ऐसे में जिन छात्रों के पीसीएम के तीनों विषयों में कम अंक आए हैं, उनके लिए केवल एक विषय की परीक्षा देकर 75% का मानदंड पूरा करना कठिन माना जा रहा है।
सप्लीमेंट्री परीक्षाएं 15 जुलाई से आयोजित होंगी। वहीं री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया 18 मई से शुरू होगी।
मार्क्स वेरिफिकेशन शुल्क: 500 रुपये प्रति विषय
स्कैन कॉपी शुल्क: 700 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका
री-इवैल्यूएशन शुल्क: 100 रुपये प्रति प्रश्न
अभिभावकों ने शुल्क को लेकर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि डिजिटल मूल्यांकन के बावजूद फीस अधिक रखी गई है।
CBSE का पक्ष
Central Board of Secondary Education ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का बचाव करते हुए कहा है कि इससे “स्टेप-वाइज और पारदर्शी मूल्यांकन” सुनिश्चित हुआ है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका की कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते