अब सैटेलाइट तकनीक से होगा भूमि सीमांकन, जौनपुर की सभी तहसीलों को मिला GNSS रोवर


जौनपुर। जिले में भूमि सीमांकन को अधिक सटीक, पारदर्शी और विवादरहित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. की अध्यक्षता में ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रोवर के माध्यम से भूमि सीमांकन विषयक कार्यशाला आयोजित की गई।
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत वैज्ञानिक एवं त्रुटिरहित पैमाइश सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा जनपद की प्रत्येक तहसील को एक-एक GNSS रोवर तथा आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके संचालन के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को पूर्व में ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
कार्यशाला में बताया गया कि GNSS रोवर सैटेलाइट से प्राप्त निर्देशांकों के आधार पर भूमि की दूरी, कोण और क्षेत्रफल का अत्यंत सटीक आकलन करता है। इस तकनीक में दो बिंदुओं के बीच अधिकतम 3 सेंटीमीटर तक का ही विचलन संभव है, जिससे सीमांकन अधिक विश्वसनीय और वैज्ञानिक होगा।
मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अम्बष्ठ ने जानकारी दी कि पारंपरिक फीता और जरीब से होने वाली पैमाइश में ऊंची-नीची भूमि के कारण त्रुटियां आ जाती थीं, जबकि GNSS रोवर इस समस्या को काफी हद तक समाप्त कर देगा। साथ ही इससे प्राप्त सभी आंकड़ों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर उनका पुनः परीक्षण भी किया जा सकेगा।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि GNSS रोवर से प्राप्त आंकड़े तकनीकी सहायता के रूप में उपयोग होंगे। अंतिम सीमांकन राजस्व अभिलेखों, स्वीकृत नक्शों और विधिक प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी राजस्व अधिकारियों को नई तकनीक का पूर्ण प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए तथा अधिवक्ताओं से भी सहयोग की अपील की, ताकि भूमि विवादों का पारदर्शी, त्वरित और त्रुटिरहित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) परमानन्द, सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कलेक्ट्रेट बार के अध्यक्ष एवं अधिवक्तागण उपस्थित रहे।

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