दहशत के चार दशक: पुलिस की गोलियों को दी मात, जरायम की दुनिया ने ही ली जान मुन्ना बजरंगी: आगाज से अंजाम तक

जौनपुर/लखनऊ। पूर्वांचल की अपराध दुनिया में चार दशकों तक दहशत का पर्याय रहे कुख्यात गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। कई बार पुलिस की गोलियों का सामना करने के बावजूद जिंदा बच निकलने वाला यह अपराधी आखिरकार उसी दुनिया का शिकार बना, जिसे उसने खुद खड़ा किया था। 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में उसकी हत्या के साथ इस खूनी अध्याय का अंत हो गया।
साधारण परिवार से अपराध की राह तक
जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में वर्ष 1967 में जन्मे प्रेम प्रकाश सिंह एक साधारण किसान परिवार से थे। पिता पारसनाथ सिंह चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जिए, लेकिन प्रेम प्रकाश का मन पढ़ाई में नहीं लगा। पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया और कुश्ती व हथियारों की ओर झुकाव बढ़ गया। हनुमान भक्ति के कारण उसे ‘बजरंगी’ कहा जाने लगा, जबकि घर में ‘मुन्ना’ नाम से पुकारा जाता था।
कम उम्र में ही एक पारिवारिक विवाद ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। चाचा के अपमान का बदला लेने के लिए उसने देसी कट्टे से हत्या कर दी। यही वह घटना थी, जिसने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
अपराध की दुनिया में बढ़ता कदम
17 वर्ष की उम्र में उसके खिलाफ पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद उसने स्थानीय माफिया गजराज सिंह के साथ जुड़कर अपराध की दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत की। 1990 के दशक में उसकी मुलाकात गैंगस्टर कृपा चौधरी के जरिए मुख्तार अंसारी से हुई, जो उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसके बाद वह मुख्तार का करीबी बन गया और बड़े अपराधों में शामिल होने लगा।
सनसनीखेज वारदातों से बना खौफ का नाम
1990 के दशक में मुन्ना बजरंगी ने कई हत्याओं को अंजाम दिया। 1993 में जौनपुर में भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या, 1995 में वाराणसी में छात्र नेता राम प्रकाश शुक्ल की हत्या और 1996 में AK-47 से ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे की हत्या जैसी घटनाओं ने उसे पूर्वांचल का सबसे खतरनाक अपराधी बना दिया।
11 गोलियां लगीं, फिर भी जिंदा बचा
1998 में दिल्ली के समयपुर बादली में पुलिस मुठभेड़ में उसे 11 गोलियां लगीं, लेकिन वह बच गया। यह घटना उसकी अपराधी छवि को और खतरनाक बना गई।
कृष्णानंद राय हत्याकांड से मचा हड़कंप
2005 में गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया। इस हत्याकांड में सैकड़ों गोलियां चलाई गईं। इसके बाद वह मोस्ट वॉन्टेड घोषित हुआ और उस पर इनाम रखा गया।
गिरफ्तारी और जेल से भी जारी रहा नेटवर्क
2009 में दिल्ली पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तार किया। जेल में रहने के बावजूद उसका नेटवर्क सक्रिय रहा और वह वहीं से वसूली व धमकी का खेल चलाता रहा। उसके खिलाफ 40 से अधिक हत्याओं के आरोप बताए जाते हैं।
जेल में ही हुआ अंत
9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में साथी कैदी सुनील राठी ने उसे गोली मार दी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह सुनियोजित हत्या थी, जिसमें जेल के अंदर हथियार पहुंचाए गए थे। इस घटना ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अपराध की दुनिया का कड़वा सच
मुन्ना बजरंगी की कहानी बताती है कि कैसे एक साधारण परिवार का युवक गलत संगत, महत्वाकांक्षा और सत्ता की चाह में अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया। लेकिन अंततः उसी अंधेरी दुनिया ने उसकी जान ले ली।
यह दास्तान एक चेतावनी भी है—अपराध का रास्ता भले ही ताकत और पहचान दिलाए, लेकिन उसका अंत हमेशा विनाश में ही होता है।