1997 के छात्र आंदोलन से लेकर NEET-UG विवाद तक: धर्मेंद्र प्रधान पर उठते सवाल

नई दिल्ली/भुवनेश्वर। देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। कई राज्यों में छात्र सड़कों पर उतरकर परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कुछ छात्र संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा उठाई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर वर्ष 1997 का एक पुराना छात्र आंदोलन फिर चर्चा में आ गया है। जानकारी के अनुसार, उस समय ओडिशा में कथित परीक्षा पेपर लीक के विरोध में करीब 1,500 छात्रों ने भुवनेश्वर स्थित सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। उस आंदोलन में छात्र नेता और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव रहे धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल थे।
बताया जाता है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्र घायल हुए थे और धर्मेंद्र प्रधान के भी चोटिल होने की बात कही जाती है। उस समय छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
अब, वर्तमान में NEET-UG परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच इस पुराने आंदोलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जो नेता कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे, आज वही शिक्षा मंत्री के रूप में इस तरह के आरोपों को लेकर घिरे हुए हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से बार-बार यह कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, उनका विरोध जारी रहेगा।
इस मुद्दे ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।