फ्लैट हड़पकर मां को घर से निकाला, मौत पर चारों बेटों ने नहीं दिया कंधा

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से बुजुर्ग मां के साथ कथित उपेक्षा का बेहद मार्मिक मामला सामने आया है। सिलिकॉन सिटी क्षेत्र की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई को उनके चार बेटों से जुड़ी परिस्थितियों के चलते घर से बाहर होना पड़ा। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, लता बाई ने अपनी जमा पूंजी और जेवर बेचकर फ्लैट खरीदा था, जिसे बाद में उनके एक बेटे ने कथित तौर पर अपने नाम करा लिया। इसके बाद बुजुर्ग महिला को घर से बाहर कर दिया गया।
बेघर होने के बाद लता बाई की मदद प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा ने की। मेडिकल जांच के बाद उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में रखा गया, जहां करीब आठ महीने तक संस्था के लोगों ने उनकी देखभाल की। इस दौरान, संस्था के अनुसार, उनके चारों बेटों में से किसी ने उनकी सुध नहीं ली।
कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर लता बाई को इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मृत्यु की सूचना चारों बेटों तक पहुंचाई गई, लेकिन संस्था के मुताबिक कोई भी बेटा अस्पताल नहीं पहुंचा और न ही अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
इसके बाद प्रीयु फाउंडेशन और जानकी वृद्धाश्रम के सेवादारों ने आगे बढ़कर उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी निभाई। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रीजनल पार्क मुक्तिधाम में विधि-विधान से लता बाई का अंतिम संस्कार किया गया।
वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़ा कानून
भारत में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 लागू है। कानून में कुछ परिस्थितियों में माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक अपनी देखभाल और भरण-पोषण के लिए संतान के खिलाफ संबंधित प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े मामलों में भी कानून में विशेष प्रावधान हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति विशेष के मामले में इन प्रावधानों का लागू होना संबंधित दस्तावेजों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
नोट: फ्लैट हड़पने और बेटों द्वारा मां को घर से निकालने संबंधी आरोप संस्था से जुड़े लोगों के हवाले से हैं। इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।