कितनी सटीक और विचारणीय बात कही है! यदि इस विचार को वास्तव में अपना लिया जाए और इस पर ईमानदारी से अमल होने लगे, तो देश की अधिकांश समस्याएँ अपने आप समाप्त हो सकती हैं। जरूरत सिर्फ सोच बदलने की नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में उतारने की है।
याद रखिए, देश बदलने के लिए हर बार क्रांति की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी नागरिकों की सोच, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा में बदलाव ही सबसे बड़ी क्रांति बन जाता है। देश तभी बदलेगा, जब हम दूसरों को बदलने की अपेक्षा करने से पहले स्वयं बदलने का संकल्प लेंगे।