⚡ बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर


उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक अहम कानूनी स्पष्टीकरण सामने आया है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर प्रीपेड होगा या पोस्टपेड — यह पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर है।
📜 कानूनी प्रावधान क्या कहता है?
▪️ विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार, बिना उपभोक्ता की लिखित सहमति के प्रीपेड मीटर लगाना गैर-कानूनी है।
▪️ अगर उपभोक्ता सहमत नहीं है, तो बिजली विभाग को पोस्टपेड मीटर ही लगाना होगा।
🔴 यूपी में बड़ा विवाद
▪️ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि राज्य में करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिना सहमति प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए गए।
▪️ परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसे कानून का उल्लंघन बताया।
📢 परिषद की मांग
▪️ सभी उपभोक्ताओं से दोबारा सहमति ली जाए।
▪️ जो उपभोक्ता प्रीपेड नहीं चाहते, उनके मीटर तुरंत पोस्टपेड में बदले जाएं।
📌 उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
▪️ नया मीटर लगवाते समय लिखित में अपनी पसंद (प्रीपेड/पोस्टपेड) जरूर दर्ज करें।
🔍 केंद्रीय मंत्री के जवाब की मुख्य बातें
✔️ सहमति के बिना प्रीपेड मीटर लगाना गैर-कानूनी
✔️ स्वेच्छा से प्रीपेड चुनने पर सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं
✔️ प्रीपेड मीटर में रियल-टाइम खपत और छूट जैसी सुविधाएं
✔️ विशेष मामलों में बिना सहमति मीटर लगाने के लिए नियामक आयोग की अनुमति जरूरी
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