बस्ती (यूपी): “साहब, मैं अभी मरा नहीं हूँ…”

—हाथ में ‘जिंदा हूँ’ की तख्ती और शरीर पर सफेद कफन ओढ़े एक बुजुर्ग की तस्वीर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का है, जहां इशहाक अली नाम के व्यक्ति को कथित साजिश के तहत कागजों में मृत घोषित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि रिटायरमेंट से करीब सात साल पहले ही उन्हें सरकारी अभिलेखों में मृत दिखा दिया गया, जिसके बाद उनकी पैतृक जमीन पर कब्जा कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इशहाक अली पिछले सात वर्षों से खुद के जीवित होने का प्रमाण देने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
अपनी जिंदा होने की गुहार को सार्वजनिक करने के लिए उन्होंने कफन ओढ़कर और ‘जिंदा हूँ’ की तख्ती लेकर विरोध जताया, जिसकी तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। यह मामला न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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