इंजीनियर से शातिर लुटेरा बना सनी सिंह, मुठभेड़ में हुआ था अंत — 11वीं बरसी पर याद आई अपराध की कहानी

वाराणसी। एक होनहार इंजीनियर, जो समाज के लिए उदाहरण बन सकता था, उसने जब अपराध की राह चुनी तो वह पूर्वांचल में खौफ का पर्याय बन गया। शातिर बदमाश रोहित सिंह उर्फ सनी सिंह की कहानी आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करती है। 29 जुलाई 2015 को यूपी एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल परिसर में मुठभेड़ के दौरान 50 हजार के इनामी सनी सिंह को ढेर कर दिया था।
घटना की रात करीब 9 बजे अस्पताल परिसर में अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी। आसपास के दुकानदारों ने घबराकर शटर गिरा दिए और लोग इधर-उधर भागने लगे। शुरुआती तौर पर इसे आतंकी घटना समझा गया, लेकिन यह एक बड़े अपराधी के अंत की कार्रवाई थी। मुठभेड़ में एसटीएफ के हेड कांस्टेबल आलोक राय घायल हो गए, लेकिन सनी सिंह का खौफ उसी रात खत्म हो गया।
27 वर्षीय सनी सिंह लंका क्षेत्र के माधव मार्केट का निवासी था और उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। तकनीकी ज्ञान और तेज दिमाग होने के बावजूद वह गलत संगत और परिस्थितियों के चलते अपराध की दुनिया में उतर गया। नवंबर 2014 में जेल से छूटने के बाद उसने अपना गिरोह दोबारा खड़ा किया और रौशन गुप्ता उर्फ किट्टू व मनीष सिंह उर्फ सोनू के साथ मिलकर पूर्वांचल में कई वारदातों को अंजाम दिया।
उसके खिलाफ हत्या, डकैती और रंगदारी के 28 से अधिक मामले दर्ज थे। गाजीपुर में दो आभूषण व्यापारियों की हत्या, सिगरा में गोकुल चौहान हत्याकांड और जगतगंज में 27 लाख की डकैती जैसी घटनाएं उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाती हैं। सनी का गिरोह तेज रफ्तार बाइक, आधुनिक हथियारों और सटीक योजना के साथ वारदात करता था। वह व्यापारियों को फोन पर धमकी देकर फिरौती मांगता था।
पुलिस मुख्यालय द्वारा 50 हजार का इनाम घोषित किए जाने के बावजूद सनी का नेटवर्क पूर्वांचल से बाहर तक फैलने लगा था। 29 जुलाई 2015 को मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ ने उसे अस्पताल परिसर में घेर लिया, जहां वह अगली वारदात की योजना बना रहा था। घेराबंदी के दौरान सनी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने उसे मार गिराया। मौके से दो पिस्तौल, बाइक और अन्य सामान बरामद हुआ, जबकि उसके दो साथी गिरफ्तार और तीन फरार हो गए।
इस मुठभेड़ की 11वीं बरसी पर सनी सिंह की कहानी एक चेतावनी बनकर सामने आती है। यह सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए सबक है कि प्रतिभा और शिक्षा भी गलत दिशा में जाकर विनाश का कारण बन सकती है। सही मार्गदर्शन, संस्कार और निगरानी ही युवाओं को अपराध की राह से बचा सकते हैं।