10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले 10 साल के अनुबंध पर भी बड़ी राहत, कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिकों और किरायेदारों को राहत देते हुए रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण की फीस में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किराया अनुबंध के पंजीकरण पर रियायत देने का निर्णय लिया गया।
सरकार के फैसले के अनुसार अब एक वर्ष के लिए दो लाख रुपये तक के वार्षिक किराये वाले रेंट एग्रीमेंट को पंजीकृत कराने पर कुल दो हजार रुपये खर्च होंगे। इसमें एक हजार रुपये स्टांप शुल्क और एक हजार रुपये पंजीकरण शुल्क शामिल होगा। पहले इसी श्रेणी के अनुबंध के पंजीकरण पर करीब 10 हजार रुपये खर्च होते थे।
स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल के अनुसार, 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले 10 वर्ष के अनुबंध के पंजीकरण पर भी शुल्क में बड़ी कमी की गई है। पहले जहां करीब दो लाख रुपये खर्च होते थे, अब यह राशि घटकर 26 हजार रुपये रह जाएगी।
मंत्री ने बताया कि 10 लाख रुपये से अधिक वार्षिक किराये वाले अनुबंधों पर इस रियायत का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं 10 लाख रुपये तक की किराया राशि पर निर्धारित छूट के बाद शेष राशि पर मौजूदा व्यवस्था के अनुसार स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क लागू होगा। टोल टैक्स और खनन से जुड़े पट्टों पर यह छूट लागू नहीं होगी।
छह महीने की छूट के बाद स्थायी फैसला
सरकार ने इससे पहले 19 नवंबर से छह महीने के लिए किराया अनुबंध के पंजीकरण पर छूट की व्यवस्था लागू की थी। सरकार के अनुसार इसके सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसे स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
बताया गया कि पिछली छूट व्यवस्था के दौरान करीब 8.31 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान को देखते हुए इस बार छूट की सीमा में बदलाव किया गया है। पहले पंजीकरण शुल्क की व्यवस्था एक हजार से 20 हजार रुपये तक थी, जिसे अब दो हजार से 26 हजार रुपये के बीच निर्धारित किया गया है।
एक साल से अधिक की किरायेदारी में पंजीकरण जरूरी
सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी के दस्तावेज का पंजीकरण कराना जरूरी है। इसके लिए निर्धारित स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क का भुगतान करना होता है। ऐसा नहीं करने पर स्टांप वाद और बकाया शुल्क की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि पंजीकृत रेंट एग्रीमेंट से मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार अधिक स्पष्ट होंगे तथा किरायेदारी से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।