पेंशनर्स के आक्रोश का प्रदर्शन, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना आठवें वेतन आयोग में पुराने पेंशनर्स को शामिल करने समेत 12 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जौनपुर। सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को जिले के पेंशनर्स ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की कथित विभेदकारी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन को ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन के देशव्यापी कार्यक्रम का भी समर्थन प्राप्त रहा। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह को सौंपा गया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान आयोजित आमसभा की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष सीबी सिंह ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री कृपाशंकर उपाध्याय ने किया। अध्यक्ष ने कहा कि आठवें वेतन आयोग को लेकर पेंशनर्स के बीच कई गंभीर आशंकाएं बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स को वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के दायरे से बाहर रखने की स्थिति ने पेंशनर्स में असंतोष पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि संगठन लंबे समय से वित्त विधेयक 2025 में तिथि के आधार पर पेंशनर्स के बीच पैदा किए जा रहे कथित भेदभाव को समाप्त करने की मांग कर रहा है। उनका कहना था कि सरकार की ओर से समय-समय पर पेंशनर्स की आशंकाओं को निराधार बताया गया, लेकिन नीतिगत प्रक्रिया में पुराने पेंशनर्स को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक भी आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किए जाएं। उन्होंने पेंशनर्स से संगठन की मांगों को लेकर बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
12 सूत्रीय मांगों पर आमसभा में बनी सहमति
जिला मंत्री कृपाशंकर उपाध्याय ने संगठन की 12 सूत्रीय मांगों को आमसभा के समक्ष रखा, जिसे उपस्थित पेंशनर्स ने सर्वसम्मति से पारित किया। प्रमुख मांगों में वित्त विधेयक 2025 में तिथि के आधार पर किए गए कथित भेदभाव वाले प्रावधान को हटाकर पुराने पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग के दायरे में लाना, वेतन आयोग की प्रक्रिया में विलंब होने की स्थिति में अंतरिम राहत देना, कर्मचारियों, पेंशनर्स और शिक्षकों के लिए अलग सीपीआई बनाए जाने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंशन में पांच प्रतिशत वृद्धि, महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे मूल वेतन एवं पेंशन में मर्ज करने सहित अन्य मांगें भी उठाई गईं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना स्थल पर जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह ने पेंशनर्स का ज्ञापन प्राप्त किया। उन्होंने ज्ञापन को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया।
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक राकेश कुमार श्रीवास्तव ने सरकार से पेंशनर्स की मांगों का शीघ्र निस्तारण करने की अपेक्षा की। उन्होंने चेतावनी दी कि पेंशनर्स की मांगों को हल्के में न लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
वक्ताओं ने पूर्व की व्यवस्था की तरह पेंशनर्स को भी वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
धरना-प्रदर्शन में कृष्ण कुमार त्रिपाठी, इं. प्रमोद कुमार सिंह, दशरथ राम, चंद्रशेखर सिंह, रामकृष्ण यादव, ओंकार नाथ मिश्र, नरेंद्र कुमार सिंह, पुट्टीलाल यादव, सूबेदार यादव, मिठाई लाल, राजेश कुमार श्रीवास्तव, मनीदेवी, महालक्ष्मी वर्मा, कांति सिंह, नंदलाल सरोज, गोरखनाथ माली, राजेंद्र प्रसाद सिंह, अशोक कुमार मौर्य, कंचन सिंह, विजय कुमार, एसएन सिंह, विनय कुमार, शंभूनाथ, राम प्रताप यादव, प्रेमधर उपाध्याय, कामरेड कल्लू, रवींद्र सिंह, रमेश, विक्रम यादव, प्रदीप कुमार सिंह, दिनेश चंद्र सिंह, बीडी सिंह, अवधेश कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, विनय कुमार गुप्ता, डॉ. आशाराम यादव, साहबाल यादव, नरेंद्र त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में पेंशनर्स मौजूद रहे।
अंत में सभाध्यक्ष सीबी सिंह ने सभी उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन जिला मंत्री कृपाशंकर उपाध्याय ने किया।