मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में पक्ष


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करना कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है, बल्कि यह संसद के अधिकार क्षेत्र में आने वाला एक “विधायी विकल्प” है।
केंद्र ने अदालत में दायर हलफनामे में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 में नियुक्ति प्रक्रिया तय करने का अधिकार संसद को दिया गया है। ऐसे में चयन समिति की संरचना तय करना विधायिका का विशेषाधिकार है।
गौरतलब है कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI की समिति से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का निर्देश दिया था। बाद में केंद्र सरकार ने नया कानून बनाकर CJI की जगह केंद्रीय मंत्री को चयन समिति में शामिल कर दिया।
इस नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को हटाने से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, जबकि केंद्र सरकार का तर्क है कि संविधान में न्यायपालिका की भागीदारी अनिवार्य नहीं बताई गई है।

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