‘सुपर अल नीनो’ को लेकर बढ़ी चिंता, मौसम और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर


वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ‘सुपर अल नीनो’ जैसी स्थिति भारत समेत कई देशों में मौसम के चरम बदलाव का कारण बन सकती है। इसके चलते भीषण गर्मी, सूखा, अनियमित बारिश और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
El Niño प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से जुड़ी एक जलवायु घटना है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव दक्षिण-पश्चिम मानसून पर देखा जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अत्यधिक शक्तिशाली “सुपर अल नीनो” की स्थिति बनती है, तो इससे कृषि उत्पादन, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। गर्मी की तीव्रता बढ़ने से हीटवेव और जल संकट की स्थिति भी गंभीर हो सकती है।
कुछ रिपोर्टों में 1877 के ऐतिहासिक सूखे और अकाल का उल्लेख किया जा रहा है, जब कमजोर मानसून के कारण भारत के कई हिस्सों में गंभीर संकट पैदा हुआ था। हालांकि वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि आधुनिक मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन प्रणालियों के कारण अब परिस्थितियों से निपटने की क्षमता पहले की तुलना में बेहतर है।
मौसम विभाग और विशेषज्ञ लगातार समुद्री तापमान तथा मानसूनी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों और आम लोगों को मौसम संबंधी आधिकारिक सलाह पर ध्यान देने की अपील की गई है।

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