अंत्योदय से ही साकार होगा नवभारत का सपना : प्रो. संजीत गुप्ता तकनीक और शिक्षा तभी सार्थक, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे : प्रो. आरके सिंह

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवभारत की वैचारिक आधारभूमि’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, अंत्योदय, तकनीक, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और लोककल्याण को एक सूत्र में जोड़ा गया है। इस परंपरा ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को ज्ञान और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि भारत आज अध्यात्म और दर्शन के साथ विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर प्रगति कर रहा है।
प्रो. गुप्ता ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए आर्यभट्ट के खगोलीय ज्ञान और पृथ्वी के गोल होने से जुड़े सिद्धांतों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ ज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में अंत्योदय की भावना निहित है। तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। तकनीक के माध्यम से गांवों के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न सेवाएं सहजता से पहुंचाई जा सकती हैं।
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें, बल्कि उसका उपयोग समाज के हित में करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा जब संवेदना से जुड़ेगी, तभी वह समाज और राष्ट्र के वास्तविक विकास का माध्यम बनेगी।
स्वागत भाषण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. मानस पांडेय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि वह कौन है और उसका लक्ष्य क्या है। लक्ष्य की पहचान कर पूरी निष्ठा से कर्म पर ध्यान केंद्रित करने से सफलता और करियर का मार्ग प्रशस्त होता है।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. संजीत कुमार गुप्ता और कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह को अभिनंदन पत्र एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। छात्र अभिनव कीर्ति पांडेय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर प्रकाश डालते हुए वसुधैव कुटुंबकम और अंत्योदय की भावना को सामाजिक समरसता एवं सर्वजन हित से जोड़ने की बात कही।
कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोधपीठ के सचिव डॉ. अनुराग मिश्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राहुल राय ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।