✍️ संपादित न्यूज़/पोस्ट (Kfdnews के लिए) “तब पत्रकारिता ‘मिशन’ थी, अब ‘कमिशन’ बनती जा रही है…”


वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी का यह बयान आज की पत्रकारिता पर गहरी चिंता व्यक्त करता है।
9 अप्रैल को हिंदी पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संपादक राजेन्द्र माथुर की पुण्यतिथि और इंदौर प्रेस क्लब के स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर खुलकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि एक समय पत्रकारिता समाज सेवा और जनहित का माध्यम हुआ करती थी, लेकिन अब कुछ हिस्सों में यह आरोप लग रहे हैं कि पत्रकारिता में दलाली, पीआर और निजी स्वार्थ हावी हो रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि आज भी बड़ी संख्या में पत्रकार ईमानदारी, निष्पक्षता और जोखिम उठाकर जनहित की पत्रकारिता कर रहे हैं।
👉 यह बयान पत्रकारिता जगत के भीतर आत्ममंथन का संकेत देता है—जहां एक ओर गिरते मानकों पर सवाल हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पत्रकारिता की उम्मीद भी कायम है।

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