फर्जी सिफारिशी पत्रों के सहारे हुए 200 नलकूप कनेक्शन महाघोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर। करीब 19 वर्ष पुराने बहुचर्चित 200 नलकूप कनेक्शन महाघोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) मेरठ को बड़ी सफलता मिली है। ईओडब्ल्यू की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन अवर अभियंता (जेई) ब्रजेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर विभागीय नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
जांच के अनुसार वर्ष 2006-07 में मुजफ्फरनगर विद्युत वितरण मंडल को सामान्य योजना के तहत 941 किसानों को वैध नलकूप कनेक्शन देने का लक्ष्य मिला था। आरोप है कि तत्कालीन जेई ब्रजेश कुमार ने अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ मिलकर निर्धारित लक्ष्य से इतर 200 अतिरिक्त नलकूप कनेक्शन अवैध रूप से जारी कर दिए। इसके लिए विभागीय सामग्री का भी कथित रूप से अनधिकृत आवंटन किया गया।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति के गांवों में स्थलों का निरीक्षण दिखाकर फर्जी एस्टीमेट तैयार किए गए और निजी नलकूप कनेक्शन जारी किए गए। इस पूरे प्रकरण से उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन को लगभग 1.39 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा कथित सिफारिशी पत्रों को लेकर हुआ। जांच में पाया गया कि अवैध कनेक्शनों को वैध दिखाने के लिए 16 सिफारिशी पत्रों का उपयोग किया गया था। इनमें पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप, उमा किरण, राम आसरे वर्मा और शाहनवाज राना के नाम शामिल थे। ईओडब्ल्यू की फॉरेंसिक जांच में ये सभी पत्र फर्जी और कूटरचित पाए गए।
घोटाले के खुलासे के बाद 4 मार्च 2008 को उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के सतर्कता विभाग के तत्कालीन निरीक्षक वीरेंद्र कुमार राय ने मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली में 33 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में मामले की जांच ईओडब्ल्यू मेरठ को सौंप दी गई।
लंबी जांच के बाद प्रदेश सरकार ने 22 मुख्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है। ईओडब्ल्यू जल्द ही अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार मुख्य आरोपी ब्रजेश कुमार से पूछताछ में कई नए तथ्य और साक्ष्य मिले हैं। इनके आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। 19 वर्ष पुराने इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में हुई गिरफ्तारी से विद्युत विभाग और संबंधित अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है।