सुप्रीम कोर्ट में राजपाल यादव को फटकार, कहा- “कोर्ट में भी एक्टिंग कर रहे हैं”

नई दिल्ली। चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके पुराने आचरण को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजपाल यादव बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं और अदालत में भी ऐसा ही कर रहे हैं। पीठ ने उनके पिछले आचरण को देखते हुए उन पर भरोसा करना मुश्किल बताया।
15 साल पुराना है मामला
यह मामला करीब 15 साल पुराना है और राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2010 में फिल्म निर्माण के लिए राजपाल यादव की प्रोडक्शन कंपनी ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब पांच करोड़ रुपये लिए थे। फिल्म के व्यावसायिक रूप से सफल नहीं होने के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद हुआ। भुगतान के लिए दिए गए चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए, जिसके बाद राजपाल यादव के खिलाफ सात अलग-अलग चेक बाउंस मामले दर्ज किए गए।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी दोषसिद्धि
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में सातों मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखी थी। उन्हें प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, सभी सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा प्रत्येक मामले में करीब 1.05 करोड़ रुपये शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया गया था। पहले जमा की गई करीब 2.25 करोड़ रुपये की राशि को भी समायोजित करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया अंतिम मौका
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राजपाल यादव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतिम मौका देते हुए दो सप्ताह के भीतर कम से कम दो करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया। शेष बकाया राशि के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
अदालत ने उनका पासपोर्ट सरेंडर रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।