जौनपुर/लखनऊ ब्रेकिंग असली दवाओं के थोक बाजार में नकली दवाओं का जाल, FSDA की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ। प्रदेश के सबसे बड़े दवा थोक बाजार में नकली और संदिग्ध दवाओं के कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम ने अमीनाबाद समेत 13 से अधिक फर्मों पर एक साथ छापेमारी कर करीब 15.50 लाख रुपये की दवाएं जब्त कीं, जबकि कई दुकानों को सील कर दिया गया।
संयुक्त मंडल आयुक्त ब्रजेश कुमार के अनुसार, जांच में सामने आया कि कुछ फर्में बिना वास्तविक सप्लाई के सिर्फ फर्जी बिलिंग कर रही थीं। कागजों पर करोड़ों का कारोबार दिखाकर नकली दवाओं का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। मिश्रा एसोसिएट्स के अवैध गोदाम से भारी मात्रा में दवाएं बरामद हुई हैं। कुल 32 नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है। दोषियों के खिलाफ बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
खतरा कितना बड़ा?
थोक बाजार से ही शहरभर के मेडिकल स्टोर और अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां नकली दवाओं की मौजूदगी का मतलब है कि मरीजों को इलाज के नाम पर जहर मिल सकता है। शुगर, बीपी और एंटीबायोटिक जैसी जरूरी दवाएं नकली होने पर मरीज की जान को सीधा खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही फर्जी बिलिंग से सरकारी राजस्व और असली दवा कंपनियों की साख को भी नुकसान पहुंच रहा है।
नकली दवा क्या होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार नकली दवाएं कई प्रकार की होती हैं—
पूरी तरह फर्जी, जिनमें असली दवा का कोई तत्व नहीं होता
गलत मात्रा वाली, जिनमें दवा बहुत कम या ज्यादा होती है
घटिया या गलत सामग्री से बनी, या एक्सपायरी दवाओं को रीपैक कर बेचा जाता है
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
नकली दवाएं “साइलेंट किलर” साबित हो सकती हैं। इससे बीमारी ठीक नहीं होती, बल्कि कई मामलों में लीवर, किडनी को नुकसान और जान का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर एंटीबायोटिक के नकली होने पर संक्रमण ठीक नहीं होता और शरीर में दवा प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित हो सकती है।
क्या रखें सावधानी?
डॉक्टरों की सलाह है कि दवा हमेशा लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें, बिल जरूर लें और पैकेट पर बैच नंबर, एक्सपायरी डेट व एमआरपी की जांच अवश्य करें।
FSDA ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक सील की गई फर्मों का संचालन बंद रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।