संतान की दीर्घायु के लिए आज रखा जा रहा जीवित्पुत्रिका व्रत माताएं रखेंगी 36 घंटे का निर्जला उपवास, जीमूतवाहन देव की पूजा-अर्चना के साथ सुनेगी व्रत कथा

जौनपुर। संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए मनाया जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जितिया या जीउतिया व्रत आज शनिवार को श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में माताओं द्वारा रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह कठिन व्रत किया जाता है।
जीवित्पुत्रिका व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं। व्रत के दौरान अन्न और जल का त्याग कर पूरी श्रद्धा के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है।
तीन दिनों तक चलता है पर्व
जीवित्पुत्रिका व्रत का अनुष्ठान तीन दिनों तक चलता है। पहले दिन शुक्रवार को नहाय-खाय की परंपरा निभाई गई। इस दिन व्रती महिलाओं ने स्नान आदि के बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत की तैयारी की।
शनिवार को मुख्य व्रत रखा जा रहा है। व्रती महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखकर शाम को विधि-विधान से भगवान जीमूतवाहन की पूजा करेंगी और व्रत कथा सुनेंगी। परंपरा के अनुसार इस दौरान मिट्टी या गाय के गोबर से चील और सियारिन की आकृतियां बनाकर भी पूजा की जाती है।
संतान की रक्षा और दीर्घायु की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी विश्वास के चलते माताएं कठिन निर्जला उपवास रखकर पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ इस पर्व को मनाती हैं।
रविवार को सूर्योदय के बाद होगा पारण
व्रत का पारण रविवार, 4 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। पूजा-पाठ और निर्धारित धार्मिक विधि पूरी करने के बाद व्रती महिलाएं अन्न-जल ग्रहण कर व्रत खोलेंगी। इस दौरान घरों में पारंपरिक पकवान और प्रसाद तैयार कर पूजा-अर्चना की जाएगी।