रामदेवपुर का जलखाता बना बदहाली की मिसाल, दुर्गंध और अतिक्रमण से ग्रामीण परेशान


📍 रामदेवपुर। ग्राम रामदेवपुर का जलखाता इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा की तस्वीर पेश कर रहा है। कभी जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा यह जलखाता अब गंदगी, जलकुंभी और कथित अवैध कब्जों की चपेट में आ गया है। जलखाते में जमा गंदे पानी और कूड़ा-कचरे से उठ रही दुर्गंध के कारण आसपास के ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जलखाते में लगातार कचरा फेंका जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र प्रदूषित हो गया है। जल की सतह पर फैली जलकुंभी और सड़ता हुआ कचरा इसकी गंभीर स्थिति को बयां कर रहा है। लोगों के अनुसार दुर्गंध इतनी अधिक है कि आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि जलखाते के आसपास धीरे-धीरे अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं, जिससे इसका मूल स्वरूप समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। कई बार संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह जलखाता केवल पानी संग्रहण का साधन नहीं, बल्कि भूजल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि समय रहते इसकी सफाई, अतिक्रमण हटाने और संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में गांव को जल संकट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
गांववासियों ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत से मांग की है कि संभावित अतिक्रमण की जांच कराई जाए, जलखाते की तत्काल सफाई कराई जाए तथा इसके सुंदरीकरण की ठोस योजना बनाकर इसे पुनर्जीवित किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि इस गंभीर समस्या पर ध्यान दे तो यह जलखाता एक बार फिर गांव की पहचान और पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बन सकता है। फिलहाल क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं और वे उम्मीद कर रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द ही इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर अपना मौन तोड़ेंगे।
— संवाददाता, रामदेवपुर

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