सपा सरकार बनी तो संभल हिंसा के मुकदमे वापस लेने का शिवपाल का ऐलान, बयान पर सियासत तेज
मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के एक बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों को लेकर बहस तेज हो गई है। शिवपाल यादव ने कहा है कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या संभल दंगे के मामलों को वापस लिया जाएगा, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब देते हुए सभी मामलों को वापस लेने की बात कही। इस बयान का वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है।
हालांकि, इस बयान को “सपा सरकार बनने पर सभी मुस्लिम अपराधियों को रिहा कर दिया जाएगा” कहना तथ्यों से आगे बढ़कर किया गया राजनीतिक दावा होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में शिवपाल यादव की बात विशेष रूप से संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों की समीक्षा और वापसी को लेकर है, न कि सभी मुस्लिम आरोपियों या अपराधियों की रिहाई को लेकर।
संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए और बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाया था। इस मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत कई लोगों के नाम भी सामने आए थे।
शिवपाल यादव के बयान को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सवाल उठा सकते हैं, जबकि सपा की ओर से इसे संभल हिंसा के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा के रूप में पेश किया जा सकता है।
फिलहाल तथ्य यही है कि शिवपाल यादव ने सपा सरकार बनने की स्थिति में संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की बात कही है। इसे सभी मुस्लिम अपराधियों की रिहाई का ऐलान बताना अलग राजनीतिक व्याख्या
मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या संभल दंगे के मामलों को वापस लिया जाएगा, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब देते हुए सभी मामलों को वापस लेने की बात कही। इस बयान का वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहा है।
हालांकि, इस बयान को “सपा सरकार बनने पर सभी मुस्लिम अपराधियों को रिहा कर दिया जाएगा” कहना तथ्यों से आगे बढ़कर किया गया राजनीतिक दावा होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में शिवपाल यादव की बात विशेष रूप से संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों की समीक्षा और वापसी को लेकर है, न कि सभी मुस्लिम आरोपियों या अपराधियों की रिहाई को लेकर।
संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए और बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाया था। इस मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत कई लोगों के नाम भी सामने आए थे।
शिवपाल यादव के बयान को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सवाल उठा सकते हैं, जबकि सपा की ओर से इसे संभल हिंसा के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा के रूप में पेश किया जा सकता है।
फिलहाल तथ्य यही है कि शिवपाल यादव ने सपा सरकार बनने की स्थिति में संभल हिंसा से जुड़े मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की बात कही है। इसे सभी मुस्लिम अपराधियों की रिहाई का ऐलान बताना अलग राजनीतिक व्याख्या