बड़गाईं जमीन मामले में CM हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय PMLA कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए मुख्यमंत्री, आरोपों को बताया निराधार; अब गवाह पेश करेगा अभियोजन पक्ष

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने बड़गाईं की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। मुख्यमंत्री अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए।
अदालत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया। हेमंत सोरेन ने आरोपों को निराधार और गलत बताया। इसके बाद विशेष अदालत ने उनके खिलाफ आरोप गठित कर दिए। अब मामले में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष गवाह पेश करेगा। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट में भी चुनौती दे चुके हैं सोरेन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप गठन की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल क्रिमिनल रिट याचिका में आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।
उनका पक्ष है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। हालांकि, विशेष पीएमएलए अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट का रुख किया।
क्या है बड़गाईं जमीन मामला?
मामला रांची के बड़गाईं अंचल में करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है। ईडी की जांच में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण से जुड़े आरोप सामने आए हैं।
इस मामले में ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। विशेष पीएमएलए अदालत में अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।
कई अन्य आरोपी भी मुकदमे का सामना कर रहे
मामले में तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिपिन सिंह, राजकुमार पाहन, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।
हालांकि, आरोप तय होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत में अभियोजन पक्ष को साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से साबित करना होगा।