अंधेरे में 15 मीटर से दोनों पैरों में सटीक गोली कैसे लगी? हाईकोर्ट के आदेश पर CBI करेगी SHO की निशानेबाजी की जांच

लखनऊ। श्रावस्ती के कथित हाफ एनकाउंटर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी अश्विनी कुमार दुबे की निशानेबाजी क्षमता की भी जांच कराने का निर्देश दिया है।
मामला मई 2025 का है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलाउद्दीन को नेपाल भागने से रोकने के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में तत्कालीन SHO ने करीब 15 मीटर की दूरी से रात के अंधेरे में दो गोलियां चलाईं, जो आरोपी के दोनों पैरों में लगीं।
अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि जब घटनास्थल पर अंधेरा था और SHO के अनुसार उन्हें केवल हथियार लोड किए जाने की आवाज सुनाई दी थी, तो 15 मीटर की दूरी से दोनों पैरों पर इतना सटीक निशाना कैसे लगा? हाईकोर्ट ने CBI को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या संबंधित अधिकारी वास्तव में ऐसी परिस्थितियों में इतनी सटीक फायरिंग करने में सक्षम थे।
कोर्ट ने घटनाक्रम में मौजूद अन्य परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। पुलिस के अनुसार मौके पर कुल 23 पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन आरोपी की कथित फायरिंग में किसी पुलिसकर्मी के घायल होने की बात सामने नहीं आई। इसके विपरीत पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी।
हाईकोर्ट ने पुलिस की एफआईआर में पुलिसकर्मियों की संख्या और वाहन में उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने इन तमाम तथ्यों को देखते हुए मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी मानी है।
अब CBI न केवल कथित मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच करेगी, बल्कि तत्कालीन SHO की शूटिंग क्षमता, फायरिंग की परिस्थितियों और पुलिस के आधिकारिक दावों की भी पड़ताल करेगी। CBI की जांच रिपोर्ट से मामले में उठे सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।